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खाटू श्याम जी की जीवन कथा – khatu Shyam ji Story in Hindi
May 5 2026 by Doj khabro ka
Khatu Shyam Ji Story In Hindi :
खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान में जयपुर के सीकर जिले में स्थित है। खाटू श्याम जी का यह मंदिर भारत में कृष्ण भगवान के मंदिरों में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, जिन्हें कलयुग का अवतार मन जाता है माना जाता है। हिंदू धर्म के मुताबिक खाटूश्याम जी को कलयुग में कृष्ण का अवतार माना गया है। खाटू श्याम मंदिर के बारे में बताया जाता है कि खाटू श्याम जी का ये मंदिर महाभारत काल में बना था, इस मंदिर का इतिहास भी महाभारत की लड़ाई से भी जुड़ा है। इसी बजह से देश भर के श्रद्धालु और पर्यटक खाटू श्याम जी की कहानी और उनकी जीवन कथा को जानने के बारे में दिलचस्पी रखते है यदि आप भी खाटू श्याम जी की जीवन कथा को जानने के लिए उत्साहित है तो इस लेख को पूरा अवश्य पढ़े 🙏
कौन है खाटू श्याम जी
खाटू श्याम जी का वास्तविक नाम श्री बर्बरीक है उनके पिता का नाम घटोत्कच और माता माता का नाम अहिलावती
( जिन्हे मौरवी के नाम से भी जाना जाता है)
खाटू श्याम जी को तीन बन धरी क्यों कहा जाता है
जब महाभारत का युद्ध चल रहा था तो बर्बरीक ने भी युद्ध में भाग लेने की इच्छा जाहिर की जब बर्बरीक युद्ध में भाग लेने जा रहे थे तभी श्री कृष्ण ने साधु का वेश धारण करके बर्बरीक को युद्ध में जाने से रोका और कहा युद्ध में बड़े बड़े योद्धा आये है और तुम क्या करोगे युद्ध में जाके तो बर्बरीक ने श्री कृष्ण से कहा मेरे तरकश में जो तीन बन है उनमे से एक ही काफी है पुरे युद्ध को समाप्त करने के लिए मेरे एक तीर से जो युद्ध लड़ रहा है वो तो मरेगा ही और लड़ने की तयारी में बैठा है वो भी मर जायेगा .
श्री कृष्ण ने कहा मई कैसे मानु की इसमें इतनी सकती है तो बर्बरीक और श्री कृष्ण जहा खड़े थे वह एक पीपल का पेड़ था तो बर्बरीक ने अपनी सकती दिखने के लिए कहा की इस पेड़ पर जितने पत्ते है मेरा तीर इन सभी पत्तो को छेदके वापस मेरे तरकश में आ जायेगा यह सुनकर श्री कृष्ण ने एक पत्ता अपने पैर से दबा लिया और कहा ठीक है चलाओ तीर बर्बरीक ने अपने तरकश से तीर निकाला और चला दिया सभी पत्तो को तीर छेदते हुए श्री कृष्ण के पैरो के पास आके रुक गया तब बर्बरीक ने कहा प्रभु अपना पेअर हटाइये एक पत्ता आपके पेअर के नीचे है तब श्री कृष्ण को विश्वास हो गया की ये एक तीर से पूरा महाभारत ख़त्म कर देगा
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कृष्ण ने बर्बरीक से शीस का दान क्यों माँगा
jai shree shyam ji