Shayam Baba Ki Jivan Gatha

Table of Contents

कौन है खाटू श्याम जी

  • खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। यह पांडुपुत्र भीम के पौत्र घटोत्कच के पुत्र है पौराणिक कथा के अनुसार, श्री कृष्ण ने इनको अमरता का वरदान दिया और कलयुग में घर घर पूजे जाने का वरदान दिया

खाटू श्याम जी को तीन बन धारी क्यों कहा जाता है?

महाभारत का युद्ध पांडवो और कोरवो के बिच हुआ पांडवो की रक्षा श्री कृष्ण कर रहे थे और कोरवो की रक्षा श्री कृष्ण की नारायणी सेना कर रही थी महाभारत के युद्ध की खबर जब महाबली बर्बरीक को मिली तो उन्होंने अपनी माँ से युद्ध में जाने की इच्छा जाहिर की बर्बरीक माँ दुर्गा के उपासक थे उन्होंने ने अपनी तपस्या से ऐसे तीन बाड़ प्राप्त किये थे की एक बाड़ से पूरा महाभारत समाप्त कर सकते थे
बर्बरीक माँ से आज्ञा पाकर युद्ध के लिए निकल पड़े माँ ने युद्ध में जाने से पहले वचन माँगा की रास्ते में अगर तुमसे कोई कुछ मांगेगा तो तुम ना नहीं करोगे और जो पक्ष हारेगा उसका साथ दोगे |
माँ को वचन देके बर्बरीक युद्ध के लिए निकल पड़े जब इसकी जानकारी श्री कृष्ण को हुई तो उन्होंने ने साधु का भेष धारण करके बर्बरीक को रस्ते में रोक लिया और कहा की बर्बरीक कहा जा रहे हो तो बर्बरीक ने कहा मई इस युद्ध में भाग लेने जा रहा हूँ तब साधु का भेष धारण किये श्री कृष्ण ने कहा इस युद्ध में बड़े बड़े योद्धा आये है तुम्हारे पास ऐसा क्या है जो तुम युद्ध में भाग लोगे तब बर्बरीक ने कहा प्रभु मेरे तरकश में जो तीन बाण है उनमे से सिर्फ एक काफी है इस युद्ध को समाप्त करने के लिए श्री कृष्ण ने कहा मैं कैसे विश्वास करू की तुम सही कह रहे हो तब बर्बरीक ने कहा प्रभु सामने पीपल का पेड़ है और मै एक बाण से पुरे पत्ते छेद दूंगा ,बर्बरीक ने निकला बाण और चला दिया उसी समय श्री कृष्ण ने एक पत्ता अपने पेअर से दबा लिया ये ज्ञात करने के लिए की क्या मैं पांडवो की ऱक्षा कर सकता हु (क्योकि श्री कृष्ण ने पांडवो की माँ को वचन दिया था की तुम्हारे पुतरोबकी रक्षा मई करूँगा .) बर्बरीक ने जो तीन चलाया वो सारे पत्तो को छेदता हुआ श्री कृष्णा के पैर के पास आके रुक गया तब बर्बरीक ने कहा प्रभु पैर हटाइये एक पत्ता आपके पैर के नीचे है तब श्री कृष्ण ने पैर हटाया और तीर पत्ते को छेदके वापस तरकश में आज्ञा इसलिए बर्बरीक को तीन बन धारी कहा जाता है .

तीन बाण इमेज

1000138410
1000138410

बर्बरीक ने शीश का दान क्यों दिया

जब श्री कृष्ण ने साधु का भेष धारण करके बर्बरीक को महाभारत के युद्ध में जाने से रोका और पूछा की किसकी तरफ से युद्ध लड़ोगे तो बर्बरीक ने कहा मैंने अपनी माँ को वचन दिया है जो पक्ष हारेगा मई उसका साथ दूंगा तब श्री कृष्णा ने कहा जब पांडव हारेंगे तो तुम पांडव की तरफ हो जाओगे और जब कौरव हारेंगे तुम कोरवो की तरफ हो जाओगे तो ऐसे तो युद्ध का निर्णय ही नहीं होगा तब बर्बरीक ने कहा प्रभु मेरा मार्ग दर्शन करे तब श्री कृष्ण ने कहा है बर्बरीक इस धरती के कल्याण के लिए एक शीश का दान चाहिए ,मै अर्जुन का शीश नहीं ले सकता क्योकि उसे युद्ध लड़ना है और साधु का भेष धारण किये कृष्ण ने कहा की कृष्ण का शीश का दान नहीं ले सकता क्योकि उसको युद्ध रचना है और बचे तुम अपने शीश का दान दो और कलयुग में धरती का कल्याण करो
तब बर्बरीक ने कहा प्रभु जो शीश का दान मांग सकता है वो साधारण पुरुष नहीं हो सकता आप अपने असली रूप में आइये मई घटोत्कच पुत्र आपको वचन देता हु की मई आपको अपना शीश दान दूंगा ये बात सुनकर साधु का भेष धारण किये कृष्ण ने अपना विशाल स्वरुप धारण किया और झोली पसारके खड़े हो गए ये देखते ही बर्बरीक ने अपने ही तलवार से अपना शीश काटके श्री कृष्ण को भेट कर दिया
1000072108
1000072108

महाबली बर्बरीक श्याम नाम से क्यों पूजे जाते है ?

जब बर्बरीक ने अपना शीश का दान दिया श्री कृष्ण को तो बर्बरीक के शीश ने कहा प्रभु मैं युद्ध लड़ना चाहता था लेकिन लड़ नहीं पाया लेकिन मैं युद्ध देखना चाहता हूँ
तब श्री कृष्ण ने शीश को अमृत पान कराके पहाड़ी की छोटी पर रख दिया जहाँ से पूरा युद्ध देखा जा सकता था
जब पूरा महाभारत ख़तम हुआ तब पांडवो में बहस हो गई की युद्ध मैंने जिताया कोई कहे मेरी वजह से युद्ध जीते तब पांडव गए श्री कृष्ण के पास प्रभु आप निर्णय करे की युद्ध किसकी वजह से जीते तब श्री कृष्ण ने कहा मुझे क्या पता मै तो अर्जुन का रथ चला रहा था मुझे क्या पता किसकी वजह से युद्ध जीते तब पांडवो ने कहा ऐसे तो हम आपस में लड़ जायेंगे तब श्री कृष्णा ने कहा एक शीश है जिसने पूरा युद्ध देखा है , एक बार मैंने उसके सामने झोली फैलाई है इस आप सब भी चलो वही निर्णय करेंगे .
श्री कृष्ण पांडवो को लेके बर्बरीक के शीश के पास गए और बोले बताओ बर्बरीक किसकी वजह से युद्ध विजय हुए तब बर्बरीक के शीश से आवाज आई हे पांडवो किस बात का घमंड करते हो मुझे तो पुरे युद्ध में श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलता दिखाई दिया मरने वाला भी कन्हैया था और मरने वाला भी कन्हैया था ये बात सुनकर श्री कृष्ण प्रसन्नता में बर्बरीक के शीश को बर्दान दिया की हे बर्बरीक जाओ मई तुम्हारे इस शीश को अमरता का वरदान देता हु की कलयुग में तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे और जो तुमने अपनी माँ को वचन दिया है की हारे के सहारे बनोगे कलयुग में जो कोई भी हरके तुम्हारे दरबार में आजाएगा वो फिर कभी नहीं हारेगा और मेरे श्याम नाम से पूजे जाओगे

खाटू श्याम जी का मंदिर कहा है ?https://khatushyamtemple.com/

खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में है जो रींगस से १८ किलोमीटर है .
  • खाटू श्याम जी जाने के लिए आप जयपुर से पहुंचकर बस से रींगस तक और रींगस से आपको पिकअप से खाटू श्याम जी जा सकते है .
  • खाटू में एक श्याम कुंड भी है जहाँ से शीश निकला था मन जाता है की उस कुंड में नहाने मात्र से सभी कस्टो से मुक्ति मिल जाती है .
  • खाटू में हर वर्ष लक्खी मेला लगता है जिसमे लाखो श्रद्धालु रींगस से खाटू श्याम जी पैदल नीसान लेके आते है .

shyam baba

1000120028
1000120028

https://dojkhabroka.com/wp-admin/post.php?post=26&action=edit

1000138421
1000138421

shyam baba ki jeewan gatha 🙏

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *